Prof. Dr. Bhalla

उम्र के साथ घुटनों का दर्द क्यों बढ़ता है?

उम्र बढ़ने के साथ घुटनों में दर्द होना एक आम समस्या है, लेकिन इसे सामान्य समझकर अनदेखा करना सही नहीं है। 40 वर्ष की आयु के बाद बहुत से लोगों को चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने, बैठने और उठने में परेशानी होने लगती है। यह केवल उम्र का असर नहीं, बल्कि शरीर में हो रहे संरचनात्मक बदलावों […]

Umr Ke Saath Ghutnon Ka Dard Kyun Badhta Hai

उम्र बढ़ने के साथ घुटनों में दर्द होना एक आम समस्या है, लेकिन इसे सामान्य समझकर अनदेखा करना सही नहीं है। 40 वर्ष की आयु के बाद बहुत से लोगों को चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने, बैठने और उठने में परेशानी होने लगती है। यह केवल उम्र का असर नहीं, बल्कि शरीर में हो रहे संरचनात्मक बदलावों का परिणाम है।

Prof. Dr. Bhalla के अनुसार, यदि घुटनों के दर्द का समय रहते सही निदान और उपचार किया जाए, तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है और सर्जरी की आवश्यकता को भी टाला जा सकता है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि उम्र के साथ घुटनों का दर्द क्यों बढ़ता है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है।

घुटने की संरचना और उसका महत्व

घुटना शरीर का सबसे बड़ा और जटिल जोड़ है। यह तीन हड्डियों से मिलकर बना होता है:

  • फीमर (जांघ की हड्डी)

  • टिबिया (पिंडली की हड्डी)

  • पटेला (घुटने की टोपी)

इन हड्डियों के बीच कार्टिलेज नामक मुलायम परत होती है, जो झटकों को अवशोषित करती है। साथ ही लिगामेंट्स, टेंडन्स और सिनोवियल फ्लूइड घुटने को स्थिरता और लचीलापन प्रदान करते हैं।

उम्र बढ़ने पर इन सभी संरचनाओं में धीरे-धीरे क्षरण शुरू हो जाता है।

उम्र के साथ घुटनों का दर्द बढ़ने के मुख्य कारण

1. कार्टिलेज का घिसना (ऑस्टियोआर्थराइटिस)

उम्र के साथ कार्टिलेज पतला और कमजोर होने लगता है। इसे ऑस्टियोआर्थराइटिस कहा जाता है।

जब कार्टिलेज घिस जाता है:

  • हड्डियाँ आपस में टकराने लगती हैं

  • सूजन और दर्द बढ़ता है

  • जोड़ में जकड़न महसूस होती है

Prof. Dr. Bhalla बताते हैं कि 50 वर्ष के बाद यह समस्या अधिक आम हो जाती है, खासकर उन लोगों में जिनका वजन अधिक है या जिनकी जीवनशैली निष्क्रिय है।

2. मांसपेशियों की कमजोरी

उम्र के साथ मांसपेशियों की ताकत कम हो जाती है, जिसे सार्कोपेनिया कहा जाता है। घुटनों के आसपास की मांसपेशियाँ यदि कमजोर हो जाएँ तो जोड़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

मजबूत क्वाड्रिसेप्स और हैमस्ट्रिंग मांसपेशियाँ घुटनों को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

3. जोड़ों में लुब्रिकेशन की कमी

सिनोवियल फ्लूइड घुटने को चिकनाई प्रदान करता है। उम्र बढ़ने के साथ इसकी गुणवत्ता और मात्रा कम हो सकती है।

इससे:

  • सुबह के समय stiffness

  • चलने में अकड़न

  • लंबे समय तक बैठने के बाद दर्द

महसूस हो सकता है।

4. पुरानी चोटों का प्रभाव

यदि पहले कभी घुटने में लिगामेंट फटा हो, मेनिस्कस डैमेज हुआ हो या फ्रैक्चर हुआ हो, तो उम्र के साथ उस स्थान पर दर्द बढ़ सकता है।

Prof. Dr. Bhalla के अनुसार, पुरानी चोटें भविष्य में गठिया का कारण बन सकती हैं।

5. वजन बढ़ना

अतिरिक्त वजन घुटनों पर अत्यधिक दबाव डालता है। हर कदम पर शरीर का लगभग 3 से 4 गुना वजन घुटनों पर पड़ता है।

मोटापा:

  • कार्टिलेज को तेजी से घिसता है

  • सूजन बढ़ाता है

  • दर्द को गंभीर बनाता है

6. हार्मोनल बदलाव

विशेषकर महिलाओं में मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव हड्डियों और जोड़ों को प्रभावित कर सकते हैं।

7. निष्क्रिय जीवनशैली

कम शारीरिक गतिविधि:

  • मांसपेशियों को कमजोर करती है

  • वजन बढ़ाती है

  • जोड़ की गतिशीलता कम करती है

नियमित गतिविधि की कमी से घुटनों का दर्द तेजी से बढ़ सकता है।

उम्र से जुड़े घुटनों के दर्द के सामान्य लक्षण

  • सुबह उठते समय जकड़न

  • सीढ़ियाँ चढ़ने में दर्द

  • सूजन और हल्की गर्माहट

  • घुटने से आवाज आना

  • लंबे समय तक बैठने के बाद दर्द बढ़ना

  • चलने में अस्थिरता

यदि ये लक्षण लगातार बने रहें, तो विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक है।

कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

निम्न स्थितियों में तुरंत परामर्श लें:

  • दर्द 2 सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे

  • सूजन कम न हो

  • घुटने का लॉक होना

  • चलने में कठिनाई

Prof. Dr. Bhalla आधुनिक जांच तकनीकों के माध्यम से सही कारण का पता लगाकर व्यक्तिगत उपचार योजना प्रदान करते हैं।

घुटनों के दर्द से बचाव और उपचार

नियमित व्यायाम

हल्के व्यायाम जैसे:

  • वॉकिंग

  • स्विमिंग

  • साइक्लिंग

  • योग

घुटनों को मजबूत बनाए रखते हैं।

वजन नियंत्रित रखें

सिर्फ 5-10% वजन कम करने से भी घुटनों के दर्द में महत्वपूर्ण राहत मिल सकती है।

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

घुटनों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करना बेहद जरूरी है। फिजियोथेरेपी से बहुत लाभ मिलता है।

संतुलित आहार

  • कैल्शियम

  • विटामिन D

  • प्रोटीन

युक्त आहार हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखता है।

समय पर चिकित्सा उपचार

शुरुआती अवस्था में दवाइयों, फिजियोथेरेपी और इंजेक्शन थेरेपी से राहत मिल सकती है। गंभीर मामलों में Knee Replacement Surgery भी एक प्रभावी विकल्प हो सकता है।

निष्कर्ष

उम्र के साथ घुटनों का दर्द बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं है। सही जीवनशैली, नियमित व्यायाम और विशेषज्ञ की सलाह से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

यदि आप घुटनों के दर्द से परेशान हैं, तो Prof. Dr. Bhalla से परामर्श लें और सही समय पर सही उपचार प्राप्त करें।

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